🪔 पितृ पक्ष 2026 | विशेष पूजा एवं अनुष्ठान

पितृ पक्ष हमारे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर है। इस पवित्र अवधि में पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान एवं पितृ शांति से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धापूर्वक किए जाते हैं। नवग्रह शक्तिपीठ डबरा में पितृ पक्ष के अवसर पर वैदिक परंपराओं एवं विधि-विधान के अनुसार संबंधित पूजा एवं अनुष्ठान संपन्न करवाने की सुविधा उपलब्ध है। अपने पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने और अपनी पूजा की तिथि एवं प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त करने के लिए आज ही संपर्क करें।

पितृ पक्ष 2026

तिथि, महत्व और धार्मिक अनुष्ठान

पितरों को श्रद्धांजलि

पितृ पक्ष अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है। इस अवधि में पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धापूर्वक किए जाते हैं। यह समय अपने पितरों के प्रति सम्मान और सनातन परंपराओं का पालन करने का विशेष अवसर माना जाता है।

pitru paksha date 2026

पितृ पक्ष का महत्व

पितृ पक्ष हिंदू धर्म में अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष समय है। इस अवधि में श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और पितृ शांति से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इस अवसर पर परिवार अपने पितरों का स्मरण करते हुए श्रद्धा एवं सम्मान व्यक्त करता है।

पितृ पक्ष में किए जाने वाले प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान

pitra dosh shanti puja

पितृ दोष शांति पूजा

पितृ दोष से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार विशेष पूजा।

pitra dosh shanti puja 2

श्राद्ध पूजा

पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक किया जाने वाला श्राद्ध।

pitra dosh shanti puja 3

तर्पण अनुष्ठान

पितरों के निमित्त जल द्वारा श्रद्धापूर्वक तर्पण कर्म।

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पिंडदान

पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक पिंड अर्पित करने की विधि।

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नारायण बलि पूजा

विशेष परिस्थितियों में विधि-विधान से  अनुष्ठान।

pitra dosh shanti puja 6

त्रिपिंडी श्राद्ध

पितृ परंपरा के अनुसार किया जाने वाला श्राद्ध।

पितृ दोष क्या है?

पितृ दोष से जुड़ी ज्योतिषीय मान्यताओं और पितृ शांति पूजा की जानकारी

ज्योतिषीय परंपराओं में पितृ दोष को जन्म कुंडली से संबंधित एक विषय माना जाता है। अलग-अलग ज्योतिषीय परंपराओं में इसकी व्याख्या और इससे जुड़े उपायों के बारे में विभिन्न मत पाए जाते हैं। पितृ पक्ष के दौरान कई परिवार अपने पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और पितृ शांति से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान करवाते हैं।

यदि आप पितृ दोष, पितृ शांति पूजा या अपने परिवार की परंपरा के अनुसार किसी विशेष अनुष्ठान के बारे में जानकारी चाहते हैं, तो पूजा से पहले योग्य आचार्य से आवश्यक जानकारी एवं विधि के संबंध में मार्गदर्शन प्राप्त करना उचित है।

पितृ पूजा बुक करें

कुछ आसान चरणों में करें अपनी पूजा बुक — श्रद्धा, विश्वास और पूर्ण विधि-विधान के साथ

01 — पूजा चुनें

अपनी आवश्यकता के अनुसार वांछित पूजा का चयन करें।

02 — बुकिंग फॉर्म भरें

अपनी व्यक्तिगत जानकारी और आवश्यक विवरण सही-सही भरें।

03 — ऑनलाइन भुगतान

सुरक्षित और आसान भुगतान के लिए Razorpay के माध्यम से पेमेंट करें।

04 — तिथि की पुष्टि

हमारी टीम आपकी booking की पुष्टि कर तिथि एवं आवश्यक जानकारी साझा करेगी।

05 — पूजा संपन्न

निर्धारित तिथि पर नवग्रह शक्तिपीठ डबरा में विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई जाएगी।

पितृ पक्ष 2026 – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पितृ पक्ष, पितृ तर्पण, श्राद्ध पूजा, पितृ दोष और नवग्रह सरोवर में होने वाले विशेष धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी एक ही स्थान पर प्राप्त करें। इस FAQ सेक्शन में पितृ पक्ष की तिथियों, श्राद्ध के महत्व, विभिन्न तिथियों पर किए जाने वाले अनुष्ठानों, पितृ दोष से जुड़ी मान्यताओं, नवग्रह शक्तिपीठ डबरा एवं नवग्रह सरोवर में होने वाली पूजा तथा ऑनलाइन पूजा बुकिंग से संबंधित सामान्य प्रश्नों के सरल और स्पष्ट उत्तर दिए गए हैं।

यह जानकारी उन श्रद्धालुओं के लिए तैयार की गई है जो पितृ पक्ष 2026 में अपने पूर्वजों की श्रद्धा एवं विधि-विधान से पूजा करवाना चाहते हैं और पूजा की तिथि, प्रक्रिया तथा आवश्यक जानकारी पहले से समझना चाहते हैं।

1. पितृ पक्ष 2026 कब से शुरू हो रहा है?

पितृ पक्ष 2026 में मुख्य रूप से 27 सितंबर 2026, रविवार से शुरू होगा और 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा। 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध है, जिसे मुख्य पितृ पक्ष से एक दिन पहले माना जाता है। पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान परिवार की परंपरा तथा संबंधित तिथि के अनुसार किए जाते हैं।

2. 26 सितंबर और 27 सितंबर में क्या अंतर है?

26 सितंबर 2026 को पूर्णिमा श्राद्ध है, जबकि 27 सितंबर को कृष्ण पक्ष प्रतिपदा श्राद्ध के साथ मुख्य पितृ पक्ष की शुरुआत होती है। इसी कारण अलग-अलग जगहों पर 26 सितंबर को पितृ पक्ष की शुरुआत बताने वाली जानकारी दिखाई दे सकती है। पंचांग के अनुसार मुख्य श्राद्ध क्रम 27 सितंबर से माना जाता है।

3. पितृ पक्ष क्या होता है?

पितृ पक्ष हिंदू परंपरा में पूर्वजों के स्मरण और उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण तथा अन्य धार्मिक कर्म करने की अवधि है। इस दौरान परिवार अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी तथा अन्य पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करता है। किस तिथि पर किस पूर्वज का श्राद्ध किया जाए, यह उनकी मृत्यु की तिथि यानी तिथि-आधारित परंपरा से निर्धारित किया जाता है। पितृ पक्ष का उद्देश्य श्रद्धापूर्वक पूर्वजों का स्मरण करना है।

4. पितृ पक्ष में श्राद्ध क्यों किया जाता है?

श्राद्ध को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता की धार्मिक परंपरा के रूप में देखा जाता है। परिवार अपनी सामर्थ्य और परंपरा के अनुसार तर्पण, पिंड अर्पण, ब्राह्मण भोजन, दान या अन्य कर्म करता है। इन अनुष्ठानों की विधि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती है। इसलिए किसी भी विशेष पूजा की विधि स्थानीय परंपरा और पंडित के मार्गदर्शन के अनुसार करना उचित रहता है।

 

5. नवग्रह शक्तिपीठ डबरा में पितृ पूजा कहाँ होती है?

नवग्रह शक्तिपीठ डबरा में पितृ पक्ष से संबंधित विशेष धार्मिक आयोजन नवग्रह सरोवर में किए जाने की जानकारी वेबसाइट पर दी जा सकती है। पेज पर सरोवर की वास्तविक तस्वीर, पूजा सामग्री और मंदिर परिसर की तस्वीरों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आयोजन स्थल की स्पष्ट जानकारी दी जा सकती है। पूजा की तिथि, उपलब्ध सेवा और बुकिंग संबंधी जानकारी के लिए navagrahadabra.com पर विवरण देखा जा सकता है।

6. नवग्रह सरोवर का पितृ पक्ष में क्या महत्व है?

नवग्रह सरोवर को इस आयोजन के प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है, जहाँ पितृ पक्ष के अवसर पर संबंधित पूजा-अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। सरोवर का वातावरण जल, दीप और धार्मिक अनुष्ठानों के कारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करता है। वेबसाइट पर आयोजन की वास्तविक प्रक्रिया, उपलब्ध पूजा और तिथि के अनुसार सेवा की जानकारी स्पष्ट रूप से देना उपयोगी रहेगा।

7. पितृ पक्ष में किस तिथि पर श्राद्ध करना चाहिए?

परंपरागत रूप से श्राद्ध मृतक की मृत्यु की हिंदू तिथि के अनुसार किया जाता है। उदाहरण के लिए यदि किसी पूर्वज का निधन कृष्ण पक्ष द्वितीया को हुआ था, तो संबंधित परिवार द्वितीया श्राद्ध के दिन कर्म कर सकता है। यदि मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, तो परिवार की परंपरा के अनुसार अमावस्या यानी सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध किया जाता है। सटीक तिथि के लिए पंचांग या आचार्य से पुष्टि करना उचित है।

8. 2026 में प्रतिपदा श्राद्ध कब है?

हाँ, नवग्रह मंदिर डबरा विप्रतिपदा श्राद्ध 27 सितंबर 2026, रविवार को है। यह पितृ पक्ष के मुख्य श्राद्ध क्रम का पहला दिन है। जिन पूर्वजों की मृत्यु प्रतिपदा तिथि को हुई थी, उनके लिए इस दिन श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है। स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि और पूजा का समय निर्धारित किया जाता है।वाह में देरी, वैवाहिक तनाव और संतान संबंधी बाधाओं के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यहाँ किए गए नवग्रह पूजन और शांति अनुष्ठान को भक्त अत्यंत प्रभावशाली मानते हैं।

9. द्वितीया श्राद्ध कब होगा?

द्वितीया श्राद्ध 28 सितंबर 2026, सोमवार को होगा। इस दिन द्वितीया तिथि से संबंधित पूर्वजों के लिए श्राद्ध किया जाता है। पूजा की वास्तविक विधि परिवार की परंपरा, स्थानीय धार्मिक नियम और आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार तय की जा सकती है।

10. महा भरणी श्राद्ध कब है?

महा भरणी श्राद्ध 29 सितंबर 2026 को बताया गया है। पितृ पक्ष में भरणी नक्षत्र से जुड़ी यह तिथि विशेष रूप से उल्लेखित होती है। जिन परिवारों में इस दिन विशेष श्राद्ध करने की परंपरा है, वे स्थानीय पंचांग और आचार्य से विधि एवं समय की पुष्टि कर सकते हैं।

11. चतुर्थी श्राद्ध कब है?

2026 के श्राद्ध कैलेंडर के अनुसार 30 सितंबर 2026, बुधवार को चतुर्थी श्राद्ध आता है। तिथि के आधार पर संबंधित पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है। इस वर्ष तिथियों के समय के कारण पंचांग में कुछ श्राद्ध एक ही दिन के आसपास दिखाई दे सकते हैं, इसलिए पूजा की तारीख तय करते समय स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना उचित है।

12. पंचमी और षष्ठी श्राद्ध कब है?

पंचमी श्राद्ध 1 अक्टूबर 2026 और षष्ठी श्राद्ध 1 अक्टूबर 2026 को आती है। पंचांग में तिथियों के समय के कारण एक ही नागरिक तारीख पर दो श्राद्ध तिथियाँ दिखाई दे सकती हैं। इसलिए केवल अंग्रेजी तारीख देखकर पूजा तय करने के बजाय संबंधित तिथि और स्थानीय पंचांग के अनुसार आयोजन करना चाहिए।

13. सप्तमी श्राद्ध कब है?

सप्तमी श्राद्ध 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को है। जिन पूर्वजों की मृत्यु सप्तमी तिथि को हुई थी, उनके लिए इस दिन श्राद्ध कर्म किया जाता है। परिवार अपनी परंपरा के अनुसार तर्पण, पिंड अर्पण और अन्य निर्धारित धार्मिक कर्म कर सकता है।

14. अष्टमी श्राद्ध कब है?

अष्टमी श्राद्ध 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को है। पितृ पक्ष की प्रत्येक तिथि उन पूर्वजों के स्मरण का अवसर मानी जाती है जिनकी मृत्यु संबंधित तिथि को हुई थी। पूजा की विधि और समय स्थान तथा पंचांग के अनुसार बदल सकते हैं, इसलिए आयोजन से पहले आवश्यक जानकारी लेना बेहतर रहता है।

15. नवमी श्राद्ध कब है?

नवमी श्राद्ध 4 अक्टूबर 2026, रविवार को है। पितृ पक्ष में नवमी श्राद्ध का अपना पारंपरिक महत्व है और कई परिवार इस दिन विशेष रूप से अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं। कुछ परंपराओं में इसे दिवंगत महिला परिजनों से जुड़े श्राद्ध के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

16. दशमी श्राद्ध कब है?

दशमी श्राद्ध 5 अक्टूबर 2026, सोमवार को है। इस दिन दशमी तिथि से संबंधित पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है। यदि परिवार को पूर्वज की मृत्यु तिथि ज्ञात है, तो उसी के अनुरूप श्राद्ध तिथि चुनना अधिक उपयुक्त माना जाता है। पूजा की विधि परिवार की परंपरा के अनुसार रखी जा सकती है।

17. एकादशी श्राद्ध कब है?

एकादशी श्राद्ध 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को है। इस दिन एकादशी तिथि से संबंधित पूर्वजों के लिए धार्मिक कर्म किए जाते हैं। पितृ पक्ष के दौरान प्रत्येक दिन की तिथि का अपना श्राद्ध क्रम होता है। आयोजन से पहले संबंधित तिथि, पूजा विधि और उपलब्ध सेवा की जानकारी प्राप्त करना उपयोगी रहेगा।

18. द्वादशी श्राद्ध कब है?

द्वादशी श्राद्ध 7 अक्टूबर 2026, बुधवार को है। इसी दिन कुछ पंचांगों में मघा श्राद्ध का भी उल्लेख मिलता है। मघा नक्षत्र से संबंधित श्राद्ध की अपनी पारंपरिक मान्यता है। यदि परिवार इस विशेष अवसर पर पूजा करना चाहता है, तो स्थानीय पंचांग और आचार्य से उचित विधि की पुष्टि करना चाहिए।

19. त्रयोदशी श्राद्ध कब है?

त्रयोदशी श्राद्ध 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को है। इस दिन त्रयोदशी तिथि से संबंधित पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है। पितृ पक्ष में पूजा का उद्देश्य श्रद्धापूर्वक पूर्वजों का स्मरण करना और पारिवारिक धार्मिक परंपरा का पालन करना है।

20. चतुर्दशी श्राद्ध कब है?

चतुर्दशी श्राद्ध 9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को है। पितृ पक्ष के अंतिम दिनों में आने वाली यह तिथि उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जिनके पूर्वजों की मृत्यु चतुर्दशी तिथि को हुई थी। संबंधित पूजा की विधि स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार निर्धारित की जाती है।

21. सर्वपितृ अमावस्या कब है?

सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को है और यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन है। जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, उनके लिए अमावस्या पर श्राद्ध करने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है। अमावस्या श्राद्ध उन पूर्वजों के लिए भी किया जाता है जिनकी मृत्यु अमावस्या तिथि पर हुई थी।

 

22. सर्वपितृ अमावस्या को विशेष क्यों माना जाता है?

सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष की अंतिम श्राद्ध तिथि है। इसका विशेष महत्व इसलिए माना जाता है क्योंकि यह उन पूर्वजों के स्मरण के लिए भी उपयोग की जाती है जिनकी निश्चित मृत्यु तिथि परिवार को ज्ञात नहीं है। 2026 में यह 10 अक्टूबर को है। इस अवसर पर परिवार अपनी परंपरा के अनुसार तर्पण, श्राद्ध और अन्य धार्मिक कर्म कर सकता है।

 

23. क्या पितृ दोष और पितृ पक्ष एक ही चीज हैं?

नहीं। पितृ पक्ष एक धार्मिक अवधि है जिसमें पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण आदि किए जाते हैं। वहीं पितृ दोष ज्योतिषीय परंपराओं में प्रयुक्त एक अलग अवधारणा है।  पितृ दोष से संबंधित पूजा के लिए योग्य आचार्य से व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर सलाह लेना उचित है।

24. क्या पितृ पक्ष में पितृ दोष की पूजा की जा सकती है?

पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों के निमित्त धार्मिक कर्मों का विशेष महत्व माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति पितृ दोष से संबंधित पूजा करवाना चाहता है, तो पहले अपनी स्थिति और परिवार की परंपरा के अनुसार आचार्य से परामर्श करना बेहतर है। नवग्रह शक्तिपीठ डबरा की वेबसाइट पर उपलब्ध पूजा सेवाओं और आयोजन की जानकारी देखकर संबंधित पूजा के लिए बुकिंग या संपर्क किया जा सकता है।

 

25. पितृ पक्ष में कौन-कौन से धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं?

परंपरा के अनुसार पितृ पक्ष में श्राद्ध, तर्पण, पिंड अर्पण, पितृ पूजा, दान और भोजन जैसे धार्मिक कर्म किए जाते हैं। कौन-सा कर्म किस परिवार के लिए आवश्यक है, यह उनकी परंपरा और पूर्वज की मृत्यु तिथि पर निर्भर करता है। नवग्रह शक्तिपीठ डबरा पर आयोजित पूजा के लिए श्रद्धालु पहले उपलब्ध अनुष्ठान और प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

26. क्या घर बैठे पितृ पूजा की बुकिंग की जा सकती है?

यदि नवग्रह शक्तिपीठ डबरा द्वारा ऑनलाइन बुकिंग सुविधा उपलब्ध है, तो श्रद्धालु वेबसाइट के माध्यम से अपनी आवश्यक जानकारी भरकर पूजा के लिए अनुरोध कर सकते हैं। बुकिंग फॉर्म में नाम, गोत्र, मोबाइल नंबर, ईमेल और पूजा से संबंधित आवश्यक विवरण लिए जा सकते हैं। बुकिंग की पुष्टि और पूजा की तिथि की जानकारी संबंधित टीम द्वारा दी जा सकती है।

27. पितृ पूजा की ऑनलाइन बुकिंग कैसे करें?

navagrahadabra.com के पितृ पक्ष पेज पर जाकर उपलब्ध पूजा विकल्प देखें, अपनी आवश्यक पूजा चुनें और बुकिंग फॉर्म में मांगी गई जानकारी भरें। इसके बाद उपलब्ध भुगतान या पुष्टि प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। यदि किसी श्रद्धालु को अपनी तिथि, पूजा या प्रक्रिया के बारे में पहले जानकारी चाहिए, तो वेबसाइट पर दिए गए WhatsApp/संपर्क विकल्प से टीम से संपर्क किया जा सकता है।

28. पूजा बुक करने से पहले कौन-सी जानकारी तैयार रखनी चाहिए?

पूजा बुकिंग से पहले यजमान का नाम, गोत्र, मोबाइल नंबर और पूर्वज से संबंधित उपलब्ध जानकारी तैयार रखना उपयोगी होता है। यदि पूर्वज की मृत्यु की तिथि या तिथि-विशेष ज्ञात है, तो वह जानकारी भी उपलब्ध रखें। इससे संबंधित श्राद्ध तिथि निर्धारित करने में सहायता मिल सकती है। अंतिम पूजा-विधि और आवश्यक विवरण संबंधित आचार्य से पुष्टि किए जा सकते हैं।

 

29. नवग्रह शक्तिपीठ डबरा में पितृ पक्ष की पूजा के लिए जानकारी कहाँ मिलेगी?

पितृ पक्ष 2026 से संबंधित पूजा, तिथियों, आयोजन स्थल, बुकिंग और संपर्क की जानकारी navagrahadabra.com के पितृ पक्ष पेज पर एक स्थान पर दी जा सकती है। वेबसाइट पर नवग्रह सरोवर, मंदिर परिसर, पूजा प्रक्रिया, तिथि सूची, FAQ और ऑनलाइन बुकिंग फॉर्म रखना श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक रहेगा। इससे उन्हें अलग-अलग वेबसाइटों पर जानकारी खोजने की आवश्यकता कम होगी।

 

30. पितृ पक्ष 2026 में नवग्रह शक्तिपीठ डबरा की पूजा कैसे बुक करें?

पितृ पक्ष 2026 के दौरान नवग्रह शक्तिपीठ डबरा में उपलब्ध पितृ पूजा या संबंधित अनुष्ठान की जानकारी वेबसाइट पर देखकर बुकिंग की जा सकती है। 27 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 के बीच अलग-अलग श्राद्ध तिथियों के अनुसार पूजा की योजना बनाई जा सकती है और 10 अक्टूबर सर्वपितृ अमावस्या के लिए भी विशेष बुकिंग जानकारी दी जा सकती है।

Navagraha Mandir Dabra is Asia’s largest Navagraha temple in Madhya Pradesh, where devotees worship all nine planetary deities in one sacred place. Located near Gwalior, it is a major pilgrimage center easily accessible by road, rail, and air.