वैदिक ज्योतिष के अनुसार मनुष्य के जीवन पर नौ ग्रहों – सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु का विशेष प्रभाव पड़ता है। जब इनमें से कोई ग्रह जन्म कुंडली में अशुभ स्थिति में होता है या उसकी महादशा, अंतर्दशा अथवा गोचर प्रतिकूल चल रहा होता है, तब व्यक्ति को जीवन में अनेक प्रकार की बाधाओं, मानसिक तनाव, आर्थिक समस्याओं, स्वास्थ्य संबंधी कष्टों तथा पारिवारिक अशांति का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसी स्थिति में वैदिक विधि से संपन्न नवग्रह शांति पूजा ग्रहों के अशुभ प्रभावों को कम करने तथा शुभ फलों की प्राप्ति के लिए अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।
✅ ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। ✅ जीवन में आने वाली बाधाओं में कमी आती है। ✅ व्यापार और नौकरी में उन्नति के अवसर बढ़ते हैं।
✅ विवाह संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है। ✅ स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।
✅ मानसिक शांति और आत्मविश्वास की वृद्धि होती है। ✅ परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण बनता है।
✅ आध्यात्मिक उन्नति एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
निम्न परिस्थितियों में नवग्रह शांति पूजा विशेष रूप से करानी चाहिए—
यदि जन्म कुंडली में किसी ग्रह की स्थिति कमजोर या अशुभ हो।
• जन्म कुंडली में ग्रह कमजोर हो
• ग्रह अशुभ भाव में स्थित हो
• बार-बार कार्यों में बाधा आए
नवग्रह शांति पूजा कब कराएं?
जब कुंडली में ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति जीवन को प्रभावित कर रही हो।
• शनि साढ़ेसाती चल रही हो
• शनि ढैया का प्रभाव हो
• शनि महादशा में परेशानियां हों
नवग्रह शांति पूजा कब कराएं?
जब शनि के कारण जीवन में संघर्ष, विलंब और बाधाएं बढ़ रही हों।
• विवाह में देरी हो रही हो
• वैवाहिक जीवन में तनाव हो
• मांगलिक दोष हो
नवग्रह शांति पूजा कब कराएं?
जब मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव से रिश्तों एवं विवाह में बाधाएं आ रही हों।
• कालसर्प दोष हो
• पितृ दोष का प्रभाव हो
• अचानक समस्याएं उत्पन्न हों
नवग्रह शांति पूजा कब कराएं?
जब राहु-केतु के कारण मानसिक तनाव और अनिश्चित बाधाएं बढ़ रही हों।
• आत्मविश्वास में कमी हो
• सरकारी कार्य अटक रहे हों
• पिता से मतभेद या कष्ट हो
नवग्रह शांति पूजा कब कराएं?
जब सूर्य ग्रह के अशुभ प्रभाव से सम्मान और प्रगति प्रभावित हो रही हो।
• मानसिक अशांति बनी रहती हो
• भय और तनाव अधिक हो
• अनिद्रा की समस्या हो
नवग्रह शांति पूजा कब कराएं?
जब मन की शांति और भावनात्मक संतुलन प्रभावित हो रहा हो।
नवग्रह शक्तिपीठ, नवग्रह साधना और वैदिक अनुष्ठानों का एक विशेष आध्यात्मिक केंद्र है।
यहाँ नौ ग्रहों की वैदिक परंपरा के अनुसार स्थापित दिव्य प्रतिमाओं एवं शक्तियों की उपासना की जाती है
अनुभवी आचार्यों द्वारा शास्त्रसम्मत विधि से पूजा, जप, हवन और अभिषेक संपन्न कराया जाता है|
प्रत्येक भक्त के नाम, गोत्र और मनोकामना के अनुसार विशेष संकल्प लेकर पूजा की जाती है।
प्रत्येक ग्रह को प्रसन्न करने के लिए उसके अनुरूप सामग्री, मंत्र और आहुतियों का प्रयोग किया जाता है।
ज्योतिषीय परामर्श एवं दोषों के अनुसार उपयुक्त उपायों का मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
मंदिर का दिव्य वातावरण साधना, पूजा और ग्रह शांति के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।
नवग्रह शांति पूजा एक वैदिक अनुष्ठान है जिसमें सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु ग्रहों की पूजा, मंत्रजाप एवं हवन किया जाता है। इसका उद्देश्य ग्रहों के अशुभ प्रभावों को कम करना और शुभ फल प्राप्त करना होता है।
जब जीवन में बार-बार बाधाएं, आर्थिक समस्याएं, मानसिक तनाव, विवाह में विलंब, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां या करियर में रुकावटें आती हैं, तब नवग्रह शांति पूजा कराना लाभकारी माना जाता है।
जब किसी योग्य ज्योतिषाचार्य द्वारा ग्रह दोष की पुष्टि हो या जीवन में लगातार नकारात्मक परिस्थितियां बन रही हों तब शुभ मुहूर्त में यह पूजा करानी चाहिए।
✅ ग्रह दोष शांति
✅ मानसिक शांति
✅ व्यापार एवं नौकरी में उन्नति
✅ स्वास्थ्य लाभ
✅ पारिवारिक सुख-समृद्धि
✅ विवाह संबंधी बाधाओं में कमी
✅ सकारात्मक ऊर्जा एवं आत्मविश्वास में वृद्धि
✅ आध्यात्मिक उन्नति
हाँ। यदि शनि ग्रह के कारण बाधाएं, साढ़ेसाती, ढैया या अन्य कष्टकारी प्रभाव बन रहे हों तो नवग्रह शांति पूजा के साथ शनि शांति अनुष्ठान भी कराया जा सकता है।
नवग्रह पूजा राहु और केतु के अशुभ प्रभावों को कम करने हेतु की जाती है। विशेष परिस्थितियों में राहु-केतु शांति पूजा या कालसर्प दोष पूजा भी कराई जाती है
हाँ। भक्त अपने नाम, गोत्र एवं संकल्प के साथ ऑनलाइन पूजा बुक कर सकते हैं। पूजा मंदिर में वैदिक विधि से सम्पन्न कराई जाती है तथा संकल्प यजमान के नाम से लिया जाता है।
आप अपनी आवश्यकता के अनुसार संकल्प करा सकते हैं:
पूजा के दौरान सभी यजमानों का नाम एवं गोत्र संकल्प में लिया जाता है।
इस पूजा में निम्न नौ ग्रहों की पूजा की जाती है:
☀ सूर्य 🌙 चंद्र 🔴 मंगल 🟢 बुध 🟡 गुरु ⚪ शुक्र ⚫ शनि 🔵 राहु 🟤 केतु
इन सभी ग्रहों के मंत्रों का जाप और हवन किया जाता है।
पूजा की अवधि अनुष्ठान के प्रकार, हवन एवं संकल्प के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सामान्यतः यह कुछ घंटों में सम्पन्न होती है।
Navagraha Shaktipeeth Temple Dabra में वैदिक मंत्रोच्चार, विशेष जड़ी-बूटियों द्वारा हवन, अनुभवी विद्वान आचार्यों के मार्गदर्शन तथा व्यक्तिगत नाम-गोत्र संकल्प के साथ पूजा सम्पन्न कराई जाती है। मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण साधना एवं ग्रह शांति के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होने पर कार्यों में आने वाली बाधाएं कम होती हैं तथा नए अवसर प्राप्त होने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
यदि विवाह में ग्रहों के कारण विलंब या बाधाएं बन रही हों तो नवग्रह शांति पूजा एवं संबंधित ग्रह शांति अनुष्ठान करवाना लाभकारी माना जाता है।
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