वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगल ग्रह साहस, ऊर्जा, भूमि, विवाह, रक्त, पराक्रम एवं आत्मविश्वास का कारक माना जाता है। जब जन्म कुंडली में मंगल अशुभ स्थिति में हो या मंगल दोष (मांगलिक दोष) बनता हो, तब व्यक्ति के जीवन में विवाह में विलंब, वैवाहिक जीवन में तनाव, क्रोध, भूमि संबंधी विवाद, दुर्घटना की आशंका तथा पारिवारिक मतभेद जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
ऐसी स्थिति में वैदिक विधि से सम्पन्न मंगल दोष शांति पूजा मंगल ग्रह के अशुभ प्रभावों को शांत करने, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति स्थापित करने, आत्मविश्वास बढ़ाने तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।
✅ मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव को शांत करने हेतु। ✅ विवाह में आने वाली बाधाओं को कम करने के लिए।
✅ दाम्पत्य जीवन में सुख एवं सामंजस्य बढ़ाने हेतु। ✅ क्रोध, मानसिक तनाव एवं आवेश को नियंत्रित करने के लिए।
✅ भूमि, भवन एवं संपत्ति संबंधी कार्यों में सफलता हेतु। ✅ दुर्घटनाओं एवं अनावश्यक विवादों से बचाव की भावना के लिए।
✅ साहस, आत्मविश्वास एवं निर्णय क्षमता बढ़ाने हेतु। ✅ सकारात्मक ऊर्जा एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए।
निम्न परिस्थितियों में मांगलिक दोष शांति पूजा विशेष रूप से करानी चाहिए—
• जन्म कुंडली में मंगल प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में हो।
• ज्योतिषीय विश्लेषण में मांगलिक दोष की पुष्टि हो।
• मंगल ग्रह अशुभ स्थिति में हो।
मंगल दोष पूजा कब कराएं?
जब योग्य ज्योतिषाचार्य द्वारा मंगल दोष की पुष्टि की जाए।
• बार-बार विवाह में रुकावट आना।
• अच्छे रिश्ते बनने के बाद टूट जाना।
• विवाह तय होने में अत्यधिक विलंब।
मंगल दोष पूजा कब कराएं?
जब विवाह में लगातार बाधाएँ उत्पन्न हो रही हों।
• पति-पत्नी के बीच लगातार विवाद।
• पारिवारिक अशांति।
• रिश्तों में विश्वास की कमी।
मंगल दोष पूजा कब कराएं?
जब दाम्पत्य जीवन में निरंतर तनाव बना रहे।
• जमीन संबंधी विवाद।
• मकान निर्माण में बाधा।
• संपत्ति मामलों में कोर्ट-कचहरी।
मंगल दोष पूजा कब कराएं?
जब भूमि एवं संपत्ति से जुड़े कार्य बार-बार बाधित हो रहे हों।
• अत्यधिक गुस्सा आना।
• निर्णय लेने में जल्दबाजी।
• छोटी-छोटी बातों पर विवाद।
मंगल दोष पूजा कब कराएं?
जब क्रोध एवं मानसिक असंतुलन जीवन को प्रभावित कर रहे हों।
• बार-बार दुर्घटना होना।
• चोट लगना।
• जोखिमपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना।
मंगल दोष पूजा कब कराएं?
जब जीवन में लगातार दुर्घटनाएँ या शारीरिक संकट उत्पन्न हो रहे हों।
Navagraha Shaktipeeth Dabra नवग्रह साधना एवं वैदिक अनुष्ठानों का एक विशेष आध्यात्मिक केंद्र है।
मंगल ग्रह को प्रसन्न करने हेतु शास्त्रोक्त विधि से विशेष अभिषेक एवं पूजा संपन्न कराई जाती है।
अनुभवी विद्वान आचार्यों द्वारा मंगल बीज मंत्र एवं वैदिक मंत्रों के साथ संपूर्ण पूजा कराई जाती है।
यजमान के नाम, गोत्र एवं मनोकामना के अनुसार विशेष संकल्प लेकर पूजा संपन्न की जाती है।
मंगल ग्रह से संबंधित समिधा एवं सामग्री द्वारा वैदिक हवन कराया जाता है।
पूजा के साथ ज्योतिषीय परामर्श एवं उचित उपायों का मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाता है।
मंदिर का दिव्य वातावरण साधना, पूजा एवं ग्रह शांति के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।
मंगल दोष (मांगलिक दोष) वैदिक ज्योतिष में बनने वाला एक विशेष ग्रह योग माना जाता है। जब जन्म कुंडली में मंगल ग्रह कुछ विशेष भावों (प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश) में स्थित होता है, तब इसे मांगलिक दोष कहा जाता है। इसका प्रभाव विशेष रूप से विवाह, दाम्पत्य जीवन, आत्मविश्वास, भूमि एवं पारिवारिक जीवन पर माना जाता है।
धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार विवाह में विलंब, वैवाहिक जीवन में तनाव, बार-बार क्रोध आना, भूमि विवाद, दुर्घटनाएँ, मानसिक अशांति तथा कार्यों में अनावश्यक बाधाएँ मंगल दोष के संभावित संकेत माने जाते हैं। वास्तविक स्थिति का निर्णय योग्य ज्योतिषाचार्य द्वारा कुंडली विश्लेषण के बाद ही किया जाना चाहिए।
मंगल दोष पूजा का उद्देश्य मंगल ग्रह की अशुभता को शांत करना, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, आत्मविश्वास, सकारात्मक ऊर्जा एवं जीवन में संतुलन की प्रार्थना करना है। यह पूजा वैदिक मंत्रोच्चार एवं शास्त्रोक्त विधि से संपन्न की जाती है।
जब जन्म कुंडली में मंगल दोष की पुष्टि हो, विवाह में लगातार विलंब हो रहा हो, दाम्पत्य जीवन में तनाव हो या ज्योतिषाचार्य इसकी सलाह दें, तब मंगल दोष पूजा कराना शुभ माना जाता है। मंगलवार, मंगल नक्षत्र एवं शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है।
वैदिक ज्योतिष में ऐसी मान्यता है कि कुछ स्थितियों में मंगल दोष विवाह में विलंब या वैवाहिक जीवन में चुनौतियों से जुड़ा हो सकता है। हालांकि प्रत्येक कुंडली अलग होती है, इसलिए केवल मंगल दोष देखकर निष्कर्ष नहीं निकाला जाता। संपूर्ण कुंडली का विश्लेषण आवश्यक होता है।
यह एक सामान्य धारणा है, लेकिन हर स्थिति में ऐसा आवश्यक नहीं होता। कुंडली में मंगल दोष की तीव्रता, अन्य ग्रहों की स्थिति तथा दोष के परिहार योगों को देखकर ही योग्य ज्योतिषाचार्य उचित सलाह देते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगल दोष पूजा से मंगल ग्रह की शांति, वैवाहिक जीवन में सामंजस्य, मानसिक संतुलन, साहस, आत्मविश्वास तथा सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने की प्रार्थना की जाती है।
हाँ। Navagraha Shaktipeeth Dabra में देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन संकल्प के साथ मंगल दोष पूजा की सुविधा उपलब्ध है। यजमान के नाम, गोत्र एवं मनोकामना के अनुसार वैदिक विधि से पूजा संपन्न कराई जाती है।
पूजा में संकल्प, गणेश पूजन, नवग्रह पूजन, मंगल ग्रह का विशेष अभिषेक, मंगल बीज मंत्र जप, हवन, आहुति एवं पूर्णाहुति जैसे शास्त्रोक्त अनुष्ठान किए जाते हैं।
ऑनलाइन या ऑफलाइन पूजा के लिए सामान्यतः यजमान का नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो), जन्म विवरण (यदि आवश्यक हो) तथा मनोकामना ली जाती है, ताकि शास्त्रोक्त संकल्प किया जा सके।
पूजा की विधि एवं संकल्प के अनुसार सामान्यतः 2 से 4 घंटे का समय लग सकता है। विशेष अनुष्ठान होने पर समय अधिक भी हो सकता है।
हाँ। Navagraha Shaktipeeth Dabra में उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार ऑनलाइन पूजा के बाद प्रसाद, पूजा का विवरण, फोटो अथवा वीडियो श्रद्धालु को उपलब्ध कराया जा सकता है।
मंगल ग्रह का प्रसिद्ध बीज मंत्र है—
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः॥
इस मंत्र का जप श्रद्धा एवं नियमपूर्वक करने की परंपरा है। किसी विशेष साधना के लिए योग्य आचार्य से मार्गदर्शन लेना उचित रहता है।
यहाँ अनुभवी विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार, शास्त्रोक्त विधि, व्यक्तिगत संकल्प, विशेष हवन एवं मंगल ग्रह से संबंधित अनुष्ठानों के साथ पूजा संपन्न कराई जाती है। देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों प्रकार की पूजा सुविधा उपलब्ध है।
आप Navagraha Shaktipeeth Dabra की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर मंगल दोष पूजा का उपयुक्त पैकेज चुन सकते हैं। इसके बाद अपना नाम, गोत्र, आवश्यक जानकारी भरकर सुरक्षित ऑनलाइन भुगतान के माध्यम से पूजा बुक की जा सकती है।