बुध ग्रह की पूजा की परंपरा की शुरुआत कैसे हुई?
प्राचीन भारत में व्यापार, ज्ञान और गणना को जीवन की सबसे बड़ी शक्तियाँ माना जाता था।
ऋषियों ने पाया कि कुछ विशेष दिनों में मानसिक स्पष्टता और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ जाती थी—जिसका श्रेय वे बुध ग्रह की ऊर्जा को देते थे।
पुराणों में बुध को चंद्र और तारा का पुत्र बताया गया है, जो ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक है।
तभी से शिक्षा, व्यापार और मानसिक विकास के लिए बुध की पूजा शुरू हुई।
राजा और व्यापारी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले गलतियों से बचने के लिए बुध ग्रह की पूजा करते थे।
बुध ग्रह के कमजोर होने पर क्या समस्याएं उत्पन्न होती हैं?
जब किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध अशुभ स्थिति में होता है, तो उसे निम्नलिखित प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है:
• पढ़ाई में एकाग्रता की कमी
• गलत निर्णय लेना
• व्यापार में नुकसान
• बार-बार धोखा खाना
• बोलने में झिझक
• मानसिक भ्रम
इसे बुध दोष (मर्करी डिफेक्ट) के नाम से जाना जाता है।