वैदिक ज्योतिष में अंगारक दोष तब बनता है जब जन्म कुंडली में मंगल (भौम) और राहु का विशेष संयोग (युति) होता है। इस योग को कई ज्योतिषीय परंपराओं में चुनौतीपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह व्यक्ति के स्वभाव, निर्णय क्षमता, मानसिक संतुलन तथा जीवन के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दोष के कारण क्रोध, मानसिक तनाव, अचानक बाधाएँ, भूमि विवाद, दुर्घटनाएँ, वैवाहिक समस्याएँ, व्यवसाय में रुकावट तथा अनावश्यक संघर्ष जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
अंगारक दोष शांति पूजा वैदिक मंत्रोच्चार, विशेष हवन एवं शास्त्रोक्त विधि से संपन्न की जाती है। इसका उद्देश्य मंगल एवं राहु ग्रहों की अशुभता को शांत कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति, साहस, आत्मविश्वास तथा सफलता की प्रार्थना करना है।
✅ राहु एवं मंगल के अशुभ प्रभावों की शांति हेतु। ✅ जीवन में बार-बार आने वाली बाधाओं को कम करने के लिए।
✅ मानसिक तनाव, क्रोध एवं अस्थिरता को नियंत्रित करने हेतु। ✅ विवाह एवं दाम्पत्य जीवन में सामंजस्य की प्रार्थना के लिए।
✅ भूमि, भवन एवं संपत्ति संबंधी समस्याओं में शुभता की कामना हेतु। ✅ व्यवसाय एवं करियर में प्रगति की प्रार्थना के लिए।
✅ दुर्घटनाओं एवं अनावश्यक विवादों से बचाव की भावना के लिए। ✅ आध्यात्मिक उन्नति एवं सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने हेतु।
निम्न परिस्थितियों में अंगारक दोष शांति पूजा विशेष रूप से करानी चाहिए—
• राहु और मंगल की युति होना।
• योग्य ज्योतिषाचार्य द्वारा अंगारक दोष की पुष्टि होना।
पूजा कब कराएं?
जब कुंडली विश्लेषण में अंगारक दोष की पुष्टि की जाए।
• वाहन दुर्घटना।
• चोट लगना।
• अचानक संकट उत्पन्न होना।
पूजा कब कराएं?
जब बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार दुर्घटनाएँ या शारीरिक कष्ट सामने आएँ।
• अत्यधिक गुस्सा।
• मानसिक अशांति।
• छोटी बातों पर विवाद।
पूजा कब कराएं?
जब मानसिक संतुलन एवं धैर्य लगातार प्रभावित हो रहा हो।
• विवाह में विलंब।
• वैवाहिक जीवन में तनाव।
• पति-पत्नी के बीच बार-बार विवाद।
पूजा कब कराएं?
जब दाम्पत्य जीवन में लगातार समस्याएँ बनी रहें।
• संपत्ति विवाद।
• व्यवसाय में नुकसान।
• कार्यों में रुकावट।
पूजा कब कराएं?
जब लगातार आर्थिक एवं व्यवसायिक समस्याएँ उत्पन्न हो रही हों।
• कार्य बनते-बनते बिगड़ जाना।
• आत्मविश्वास की कमी।
• निराशा एवं असफलता।
पूजा कब कराएं?
जब जीवन में लगातार नकारात्मक परिस्थितियाँ बनी रहें।
Navagraha Shaktipeeth Dabra नवग्रह साधना एवं वैदिक अनुष्ठानों का एक विशेष आध्यात्मिक केंद्र है।
राहु एवं मंगल ग्रह की शांति हेतु शास्त्रों में वर्णित विशेष हवन सामग्री एवं वैदिक विधि से हवन कराया जाता है।
अनुभवी विद्वान आचार्यों द्वारा राहु एवं मंगल ग्रह के वैदिक मंत्रों तथा बीज मंत्रों के साथ संपूर्ण पूजा संपन्न कराई जाती है।
यजमान के नाम, गोत्र एवं मनोकामना के अनुसार विशेष संकल्प लेकर पूजा संपन्न की जाती है।
मंगल ग्रह से संबंधित समिधा एवं सामग्री द्वारा वैदिक हवन कराया जाता है।
पूजा के साथ ज्योतिषीय परामर्श एवं उचित उपायों का मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाता है।
मंदिर का दिव्य वातावरण साधना, पूजा एवं ग्रह शांति के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।
मंगल दोष (मांगलिक दोष) वैदिक ज्योतिष में बनने वाला एक विशेष ग्रह योग माना जाता है। जब जन्म कुंडली में मंगल ग्रह कुछ विशेष भावों (प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश) में स्थित होता है, तब इसे मांगलिक दोष कहा जाता है। इसका प्रभाव विशेष रूप से विवाह, दाम्पत्य जीवन, आत्मविश्वास, भूमि एवं पारिवारिक जीवन पर माना जाता है।
धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार विवाह में विलंब, वैवाहिक जीवन में तनाव, बार-बार क्रोध आना, भूमि विवाद, दुर्घटनाएँ, मानसिक अशांति तथा कार्यों में अनावश्यक बाधाएँ मंगल दोष के संभावित संकेत माने जाते हैं। वास्तविक स्थिति का निर्णय योग्य ज्योतिषाचार्य द्वारा कुंडली विश्लेषण के बाद ही किया जाना चाहिए।
मंगल दोष पूजा का उद्देश्य मंगल ग्रह की अशुभता को शांत करना, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, आत्मविश्वास, सकारात्मक ऊर्जा एवं जीवन में संतुलन की प्रार्थना करना है। यह पूजा वैदिक मंत्रोच्चार एवं शास्त्रोक्त विधि से संपन्न की जाती है।
जब जन्म कुंडली में मंगल दोष की पुष्टि हो, विवाह में लगातार विलंब हो रहा हो, दाम्पत्य जीवन में तनाव हो या ज्योतिषाचार्य इसकी सलाह दें, तब मंगल दोष पूजा कराना शुभ माना जाता है। मंगलवार, मंगल नक्षत्र एवं शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है।
वैदिक ज्योतिष में ऐसी मान्यता है कि कुछ स्थितियों में मंगल दोष विवाह में विलंब या वैवाहिक जीवन में चुनौतियों से जुड़ा हो सकता है। हालांकि प्रत्येक कुंडली अलग होती है, इसलिए केवल मंगल दोष देखकर निष्कर्ष नहीं निकाला जाता। संपूर्ण कुंडली का विश्लेषण आवश्यक होता है।
यह एक सामान्य धारणा है, लेकिन हर स्थिति में ऐसा आवश्यक नहीं होता। कुंडली में मंगल दोष की तीव्रता, अन्य ग्रहों की स्थिति तथा दोष के परिहार योगों को देखकर ही योग्य ज्योतिषाचार्य उचित सलाह देते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगल दोष पूजा से मंगल ग्रह की शांति, वैवाहिक जीवन में सामंजस्य, मानसिक संतुलन, साहस, आत्मविश्वास तथा सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने की प्रार्थना की जाती है।
हाँ। Navagraha Shaktipeeth Dabra में देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन संकल्प के साथ मंगल दोष पूजा की सुविधा उपलब्ध है। यजमान के नाम, गोत्र एवं मनोकामना के अनुसार वैदिक विधि से पूजा संपन्न कराई जाती है।
पूजा में संकल्प, गणेश पूजन, नवग्रह पूजन, मंगल ग्रह का विशेष अभिषेक, मंगल बीज मंत्र जप, हवन, आहुति एवं पूर्णाहुति जैसे शास्त्रोक्त अनुष्ठान किए जाते हैं।
ऑनलाइन या ऑफलाइन पूजा के लिए सामान्यतः यजमान का नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो), जन्म विवरण (यदि आवश्यक हो) तथा मनोकामना ली जाती है, ताकि शास्त्रोक्त संकल्प किया जा सके।
पूजा की विधि एवं संकल्प के अनुसार सामान्यतः 2 से 4 घंटे का समय लग सकता है। विशेष अनुष्ठान होने पर समय अधिक भी हो सकता है।
हाँ। Navagraha Shaktipeeth Dabra में उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार ऑनलाइन पूजा के बाद प्रसाद, पूजा का विवरण, फोटो अथवा वीडियो श्रद्धालु को उपलब्ध कराया जा सकता है।
मंगल ग्रह का प्रसिद्ध बीज मंत्र है—
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः॥
इस मंत्र का जप श्रद्धा एवं नियमपूर्वक करने की परंपरा है। किसी विशेष साधना के लिए योग्य आचार्य से मार्गदर्शन लेना उचित रहता है।
यहाँ अनुभवी विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार, शास्त्रोक्त विधि, व्यक्तिगत संकल्प, विशेष हवन एवं मंगल ग्रह से संबंधित अनुष्ठानों के साथ पूजा संपन्न कराई जाती है। देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों प्रकार की पूजा सुविधा उपलब्ध है।
आप Navagraha Shaktipeeth Dabra की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर मंगल दोष पूजा का उपयुक्त पैकेज चुन सकते हैं। इसके बाद अपना नाम, गोत्र, आवश्यक जानकारी भरकर सुरक्षित ऑनलाइन भुगतान के माध्यम से पूजा बुक की जा सकती है।