आज डबरा की पावन धरा पर आध्यात्म और साहित्य का एक अद्भुत संगम होने जा रहा है। एशिया के अद्वितीय नवग्रह मंदिर के प्रांगण में, देश के प्रख्यात कवि और युवाओं की धड़कन डॉ. कुमार विश्वास आज से अपने बहुचर्चित कार्यक्रम ‘अपने-अपने राम’ का शुभारंभ कर रहे हैं।
यह केवल एक कथा नहीं, बल्कि जीवन को समझने का एक जरिया है। आइए जानते हैं कि यह आयोजन इतना खास क्यों है और आपको इससे क्यों जुड़ना चाहिए।
‘अपने-अपने राम’: एक नई दृष्टि
डॉ. कुमार विश्वास जब राम की बात करते हैं, तो वे केवल रामायण के प्रसंग नहीं सुनाते, बल्कि वे राम को आज के जीवन में उतारते हैं। ‘अपने-अपने राम’ के माध्यम से वे बताते हैं कि:
- राम केवल त्रेता युग के राजा नहीं, बल्कि हर युग की आवश्यकता हैं।
- कैसे प्रभु राम का जीवन एक पुत्र, भाई, पति और राजा के रूप में आज के युवाओं के लिए एक ‘रोल मॉडल’ है।
- उनके संवादों में हास्य, व्यंग्य और करुणा का ऐसा मिश्रण होता है जो ८ साल के बच्चे से लेकर ८० साल के बुजुर्ग तक, सभी को मंत्रमुग्ध कर देता है।
नवग्रह मंदिर: आस्था का नया केंद्र
इस कार्यक्रम की भव्यता को और बढ़ा रहा है इसका आयोजन स्थल—नवग्रह मंदिर (डबरा)। यह मंदिर अपने आप में स्थापत्य कला और ज्योतिष विज्ञान का बेजोड़ नमूना है:
- 108 खंभों पर टिका विश्वास: यह पूरा मंदिर 108 खंभों पर बना है, जो हिंदू धर्म और ज्योतिष में अत्यंत पवित्र अंक माना जाता है।
- सभी ग्रह एक साथ: यह संभवतः एशिया का पहला ऐसा मंदिर है जहाँ सभी नवग्रह अपनी पत्नियों (शक्तियों) के साथ विराजमान हैं।
- इस पवित्र प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान यहाँ की ऊर्जा और वातावरण अत्यंत दिव्य है।
आज का कार्यक्रम: क्या उम्मीद करें?
आज, 14 फरवरी से 16 फरवरी तक चलने वाले इस सत्र में डॉ. विश्वास रामकथा के उन पहलुओं को छुएंगे जो अक्सर अनछुए रह जाते हैं। वे भगवान राम के वनवास के संघर्ष, माता सीता के त्याग और भरत के प्रेम को अपनी ओजस्वी वाणी में प्रस्तुत करेंगे। उनकी शैली ऐसी है कि आप कभी हसेंगे, तो कभी आपकी आँखों से अश्रु धारा बह निकलेगी।
निष्कर्ष
यदि आप डबरा या इसके आसपास हैं, तो इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनना न भूलें। और यदि आप दूर हैं, तो मानसिक रूप से इस आध्यात्मिक यात्रा में शामिल हों। प्रभु राम हम सबके हैं, और डॉ. कुमार विश्वास की वाणी में उन्हें सुनना, खुद को फिर से पहचानने जैसा है।
जय सिया राम!